By Rohit J on Feb 27, 2016, 12:00 AM

ज़िन्दगी पल-पल ढलती है,

जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है...

शिकवे कितने भी हो हर पल,
फिर भी हँसते रहना...

क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है,
बस एक ही बार मिलती है।


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